पति-पत्नी में झगड़े क्यों होते हैं ? पति-पत्नी में कलह किस ग्रह का असर? जानिए असली कारण और उपाय!

 

 

 

 

हर विवाह प्यार, भरोसे और समझ पर टिका होता है। लेकिन कई बार इन रिश्तों में बिना किसी बड़े कारण के भी तनाव और झगड़े शुरू हो जाते हैं। कुछ जोड़े छोटी-छोटी बातों पर बहस करते हैं तो कुछ के बीच दूरियां बढ़ने लगती हैं। ऐसे में सवाल उठता है , आखिर पति-पत्नी के झगड़ों के पीछे असली कारण क्या है?

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, ग्रहों की स्थिति, जन्मकुंडली के योग, दशा-अंतर्दशा और ग्रहों का पारस्परिक संबंध वैवाहिक जीवन की मधुरता या कड़वाहट पर गहरा प्रभाव डालते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि किन ग्रहों और योगों से वैवाहिक कलह पैदा होती है और ज्योतिष इसके समाधान कैसे बताता है। आज ओमांश एस्ट्रोलॉजी पति पत्नी में कलह क्यों होती हैं इसके पीछे ज्योतिषीय कारण कौन से है, इसे जानेंगे, और साथ ही जानेंगे अचूक उपाय जिनको करने से आपके वैवाहिक जीवन में खुशियां बढ़ सकती है !

 

1. सप्तम भाव – वैवाहिक जीवन का मुख्य संकेत:

जन्मकुंडली में सप्तम भाव (7th house) विवाह, जीवनसाथी और दांपत्य सुख का प्रतिनिधित्व करता है।

अगर यह भाव अशुभ ग्रहों से पीड़ित हो या इसका स्वामी कमजोर हो तो पति-पत्नी के बीच तनाव या दूरी हो सकती है।

 

उदाहरण के तौर पर अगर सप्तम भाव में राहु या केतु बैठा हो, तो रिश्ते में भ्रम, शक या अविश्वास आ सकता है। शनि या मंगल सप्तम भाव में होने से रिश्ते में ठंडापन या गुस्से की प्रवृत्ति बढ़ती है।

अगर सप्तम भाव का स्वामी अष्टम या द्वादश भाव में चला जाए तो वैवाहिक जीवन में दूरी या अलगाव की स्थिति बन सकती है।

 

 

 2. मंगल दोष – झगड़े और क्रोध का प्रमुख कारण:

मंगल ग्रह ऊर्जा, जोश और क्रोध का प्रतिनिधित्व करता है। जब यह गलत स्थानों पर बैठता है, तो व्यक्ति जल्द गुस्सा करने वाला, तुनकमिजाज या अधिकारप्रिय बन जाता है।

यदि मंगल 1st, 4th, 7th, 8th या 12th भाव में हो तो मंगलिक दोष बनता है।

पति-पत्नी दोनों की कुंडलियों में यदि यह दोष संतुलित न हो, तो आपसी टकराव बढ़ता है। ऐसे लोग छोटी बातों को भी बड़ा मुद्दा बना लेते हैं।

 

** 3. सूर्य ग्रह – अहंकार और वर्चस्व की भावना;

सूर्य आत्मविश्वास और “मैं” की भावना का प्रतीक है। यदि पति या पत्नी की कुंडली में सूर्य प्रबल हो, तो उनमें अहंकार या हठ की प्रवृत्ति देखी जाती है। ऐसे में दोनों ही अपने विचार थोपने की कोशिश करते हैं और समझौते की भावना खत्म होने लगती है।

 

** 4. राहु और केतु – भ्रम, अविश्वास और मानसिक दूरी;

राहु और केतु ऐसे ग्रह हैं जो मानसिक अस्थिरता और भ्रम पैदा करते हैं। अगर ये ग्रह सप्तम भाव या शुक्र पर दृष्टि डालते हैं, तो जीवनसाथियों के बीच गलतफहमियां, शक और अविश्वास बढ़ता है। राहु के प्रभाव में व्यक्ति को अपने साथी पर भरोसा नहीं रहता। केतु भावनात्मक दूरी या उदासीनता पैदा करता है।

कई बार ये ग्रह रिश्ते में “तीसरे व्यक्ति” के प्रवेश का संकेत भी देते हैं।

 

**5. शुक्र ग्रह – प्रेम, आकर्षण और सामंजस्य का कारक;

शुक्र प्रेम, सौंदर्य, आकर्षण और भोग-विलास का ग्रह है।

अगर शुक्र कमजोर हो जाए तो व्यक्ति भावनात्मक रूप से ठंडा, असंतुष्ट या भोगवादी बन सकता है।

ऐसे में रिश्तों में नीरसता या बेवफाई जैसी समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। शुक्र अगर नीच राशि में हो (कन्या), तो जीवन में रोमांटिक कमी या भावनात्मक ठंडापन आता है।

अगर शुक्र पर राहु की दृष्टि हो, तो व्यक्ति का झुकाव बाहरी आकर्षण की ओर हो सकता है।

 

**6. शनि ग्रह – दूरी, ठंडापन और गलतफहमी;

शनि ग्रह कर्म और जिम्मेदारी का कारक है, लेकिन जब यह पीड़ित होता है तो रिश्ते में ठंडापन, दूरी या संवाद की कमी पैदा करता है।

कभी-कभी शनि की दशा में जोड़े एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से अलग हो जाते हैं। शनि अगर सप्तम भाव में बैठा हो तो विवाह में विलंब और वैचारिक मतभेद संभव हैं। यदि शनि राहु या मंगल से युति में हो, तो जीवनसाथी के बीच दूरी बढ़ सकती है। तो ये ग्रहों से संबंधित मुख्य कारण हैं जिनकी स्थिति यदि खराब हो तो वैवाहिक जीवन में तनाव और क्लेश की स्थिति बनती है, आगे जानते हैं अचूक उपायों के बारे मे, जिनको अपनाने से आप इस समस्या से बाहर निकलते हैं!

 

 

** 7. दशा और गोचर का प्रभाव;

कई बार ग्रहों की दशा-अंतर्दशा और गोचर (Transit) वैवाहिक जीवन को अस्थिर बना देते हैं।

उदाहरण के लिए जब शनि या राहु की दशा शुरू होती है, तो पुरानी बातों पर तनाव बढ़ सकता है।

शुक्र की अंतर्दशा में रिश्ते मधुर हो सकते हैं या विवाह योग भी बन सकते हैं। केतु की दशा में मन में भ्रम और अलगाव की भावना बढ़ती है!

 

 

**वैवाहिक सुख के ज्योतिषीय उपाय:

*हर पूर्णिमा और अमावस्या को शिव-पार्वती या लक्ष्मी-नारायण की संयुक्त पूजा करें।

*पति-पत्नी को सप्ताह में एक दिन साथ में दीपक जलाकर “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना चाहिए।

*अपने शादी के दिन की तिथि अनुसार ग्रह शांति करवाएं।

*एक-दूसरे की जन्मकुंडली का मिलान कर ग्रह दोषों का समाधान करवाएं।

*घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में पीतल की शिव-पार्वती मूर्ति रखें।

*रोजाना शाम को घर में देवदीपक जलाएं और कपूर जलाएं।

* हर शुक्रवार को पति-पत्नी मिलकर गुलाब पुष्प अर्पित करें।

 

पति-पत्नी के बीच झगड़े केवल परिस्थितियों का परिणाम नहीं होते, बल्कि ये ग्रहों की चाल और मानसिक ऊर्जा का भी प्रभाव होते हैं।

अगर व्यक्ति अपनी कुंडली के दोषों को समझे और उचित उपाय करे, तो कोई भी रिश्ता फिर से मधुर बन सकता है।

ज्योतिष यही सिखाता है , ग्रह दोष केवल बाधा नहीं, बल्कि सुधार का अवसर भी हैं।

 

जहां संवाद, समझ और आस्था हो  वहां ग्रह भी हार मान लेते हैं और वैवाहिक जीवन में पुनः प्रेम की मधुरता लौट आती है। 

 

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